एच.एन.एल. के पास पूर्ण रूप से सुसज्जित निस्सारी उपचार संयंत्र है। निस्सारी बहाव की गुणवत्ता को सांविधिक विनियमन मार्गदर्शक में विनिर्दिष्ट सभी मानदण्डों से मिलाया जाता है।

आरंभ में एच.एन.एल. में निस्सारी उपचार प्रणाली को 46 मिलियन रु. की लागत पर प्रतिष्ठापित किया गया। 52 मिलियन रु. के अतिरिक्त निवेश के साथ इसे 1994 में उन्नत किया गया। निस्सारी उपचार हेतु कंपनी 25 मिलियन रु. व्यय करती है।

अन्त संयंत्र नियंत्रण मापों में तत्वत न्यून निर्मल जल खपत है। रद्दी जल का निर्माण काफी कम है तथा यह राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

देश में एच.एन.एल. ही सिर्फ मिल है जो कि निस्सारी उपचार के सभी मानदण्डों की पूर्ति करने के अलावा निस्सारी को बहाने से पूर्व उसके रंग को हटा देता है।

एच.एन.एल. प्रथम हे जिसने विरंजन में 90 ऽ क्लोरीन की जगह पर सौहार्दपूर्ण वातावरणयुक्त हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को ग्रह किया है, जिससे विषमय बहाव में कमी आती है।एच.एन.एल. के पास पूर्ण रूप से सुसज्जित निस्सारी उपचार संयंत्र है। निस्सारी बहाव की गुणवत्ता को सांविधिक विनियमन मार्गदर्शक में विनिर्दिष्ट सभी मानदण्डों से मिलाया जाता है।

आरंभ में एच.एन.एल. में निस्सारी उपचार प्रणाली को 46 मिलियन रु. की लागत पर प्रतिष्ठापित किया गया। 52 मिलियन रु. के अतिरिक्त निवेश के साथ इसे 1994 में उन्नत किया गया। निस्सारी उपचार हेतु कंपनी 25 मिलियन रु. व्यय करती है।

अन्त संयंत्र नियंत्रण मापों में तत्वत न्यून निर्मल जल खपत है। रद्दी जल का निर्माण काफी कम है तथा यह राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

देश में एच.एन.एल. ही सिर्फ मिल है जो कि निस्सारी उपचार के सभी मानदण्डों की पूर्ति करने के अलावा निस्सारी को बहाने से पूर्व उसके रंग को हटा देता है।

एच.एन.एल. प्रथम हे जिसने विरंजन में 90 ऽ क्लोरीन की जगह पर सौहार्दपूर्ण वातावरणयुक्त हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को ग्रह किया है, जिससे विषमय बहाव में कमी आती है।





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