हिन्दुस्तान न्यू.जप्रिण्ट लिमिटेड के अन्त गृह अनुसन्धान व विकास को वर्ष 1992 में वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान विबाग (डी.एस.ऐ.आर.), विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नई दिल्ली, की मान्यता प्राप्त हुई है। अनु. व विकास अनुभाग जटिल प्रयोगशाला उपस्करों से भली-भांति सुसज्जित है। इससे निम्न क्षेत्रों में अनु. व विकास की गतिविधियां की जाने की सुविधा है।

सुविधाएँ

  • लुगदीकरण
  • विरंजन
  • डी-इंकिंग
  • काग.ज निर्माण
  • रासायनिक वसूली
  • जल उपचार
  • प्रदूषण नियंत्रण

अनुसंधान व विकास गतिविधियाँ

निम्न हेतु अनुसंधान व विकास गतिविधियाँ की जाती हैं :

  • उत्पाद गुणवत्ता तथा मिल की उत्पादकता में सुधार हेतु।
  • परंपरागत कच्चे माल की कमी की पूर्ति हेतु वैकल्पिक कच्चे माल का पता लगाना।
  • वन आधारित कच्चे मालों के संरक्षण हेतु अधिक द्वितीय रेशों का उपयोग।
  • वर्तमान प्रविधि प्रौद्योगिकी में सुधार।
  • बेहतर नम सिरा योज्य की तलाश।
  • न्यू.जप्रिण्ट निर्माण प्रौद्योगिकी को सौहार्दपूर्ण वातावरणयुक्त तथा सुधारयुक्त बनाना। पर्यावरण गुणवत्ता

अब तक पूरा किए गए उत्पाद/प्रविधि विकास कार्य

  • न्यू.जप्रिण्ट फर्निश में 30-35ऽ के दर से डी-इंक्ड लुगदी का उपयोग जिसके फलस्वरूप रासायनिक लुगदी खपत में 25ऽ से 15ऽ तक की कमी आयी।
  • न्यू.जप्रिण्ट स्टॉक में फेरिक फिटकरी की जगह पर गैर फेरिक फिटकरी का मिलाया जाना, जिससे न्यु.जप्रिण्ट की चमक में 0.8ऽ ऐ.एस.ओ. की सुधार हुई।
  • पेपर मशीन के नम सिरा में दोहरी पोलीमर के उपयोग से प्रथम पॉस अवरोधन में सुधार हुआ तथा मुद्रण प्रेसों में फाहायुक्त समस्या में कमी आयी।
  • निस्सारी उपचार संयंत्र में अलूमिना आधारित रसायनों की जगह पर फेरिक क्लोराइड/फेरस क्लोराइड का उपयोग निस्सारी के रंग निष्कासन में प्रभावी साबित हुआ।
  • रसा-यांत्रिक लुगदीकरण प्रविधि में रैफिनेटर्स में खण्डतरीका के परिवर्तन के साथ परंपरागत तीन चरणों के सूक्ष्मीकरण प्रविधि को दो चरणों के सूक्ष्मीकरण प्रविधि में कम किया गया, जिससे उसी स्तर की लुगदी गुणवत्ता हेतु कम बिजली की खपत हुई।

जारी उत्पाद/प्रविधि विकास कार्य :

  • रसायांत्रिक लुगदी के पेरॉक्साइड विरंजन में उच्च गाढ़ापन को बरकरार रखने से लुगदी की चमक में वृद्धि।
  • सरकंडे तथा बाँस रासायनिक लुगदी का ई.सी.एफ. (एलिमेन्टल क्लोरीन फ्री) विरंजन।
  • रसायांत्रिक लुगदीकरण उपज तथा पेरॉक्साइड खपत पर प्रजाति, आयु तथा ऋतु का प्रभाव।




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