संयंत्र व मशीनरी

संयंत्र व मशीनरी

निर्माता के नाम

प्रतिष्ठापन वर्ष

पेपर मशीन

जे.एम. वॉइथ, जर्मनी

1982

रेफिनेटर (सी.एम.पी.)

सण्ड्स डीफैब्रेटर, स्वीडेन

1982

पेपर मशीन में गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली

मे.जरेक्स, यू.एस.ए.

1991

केमिकल अडिटिव प्लांट

सीलेयर, फ्रॉस

1982

एंड्रिट्.ज फिल्टर प्रेस (ई.टी.पी.)

एंड्रिट्.ज, ऑस्ट्रिया

1993

रोल लपेटन मशीन

क्लैनवेफेर्स, जर्मनी

1982

कोर निर्माण मशीन

गूस्ची टेन्नेसमैन

1982

मशीन वाइंडर

जागेनबेर्ग, जर्मनी

1982

टर्बो जनित्र

बी.एच.ई.एल., हैदराबाद

1982

पॉवर बॉइलर

ए.बी.बी

1982

रिकवरी बॉइलर

बी.एच.ई.एल., ट्रिच्ची

1998

बाष्पक-I

एल टी, मुम्बई

1982

बाष्पक-II

अल्फालवल, पुणे

1994

डी-इंकिंग संयंत्र

वाइथ, जेर्मनी

2002

प्रमुख प्रविधि नियंत्रण प्रणालियाँ

यूटीलिटी संयंत्र हेतु डी.सी.एस

योकोगावा ब्लू स्टार, बैंगलूर

1995

लुगदी मिलों तथा पेपर मशीन हेतु डी.सी.एस.

योकोगावा ब्लू स्टार, बैंगलूर

2002

पेपर मशीन हेतु गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली

हॉनीवेल मे.जरेक्स, यू.एस.ए.

2002

 

निम्न हेतु एच एन एल आयात प्रतिस्थापन में इच्छुक है :

  • बेयरिंग्स
  • पेपर मशीन आवरण
  • विशिष्ट रसायन

प्रत्याशित आपूर्तिकर्ता / एजेन्ट्स / ठेकेदार निम्न पर संपर्क कर सकते हैं :
श्री जॉन मैथ्यूज , विभागाध्यक्ष  (वाणिज्य) -   johnmathews@hnlonline.com

कच्ची सामग्रियाँ

आवश्यक सामग्रियाँ

  • काष्ठ, सरकंडा, बाँस आदि जैसी रेशायुक्त कच्ची सामग्रियाँ।
  • डी-इंकिंग संयंत्र हेतु पुराना समाचार पत्र (ओ.एन.पी.) तथा पुरानी पत्रिकाएँ (ओ.एम.जी)।
  • लुगदी एवं काग.ज निर्माण में उपयुक्त कॉस्टिक सोडा, हाईड्रोजेन पेरॉक्साइड जैसे रसायन।
  • क्रॉफ्ट काग.ज, ग्रे बोर्ड आदि जैसी पैकिंग सामग्रियाँ।
  • आयातित मशीनरी एवं अतिरिक्त पुर्जे।
  • मोटर्स, बेयरिंग आदि जैसे सामान्य अतिरिक्त पुर्जे।
  • कोयला, भट्टी तेल आदि जैसे ईंधन।
  • पेपर मशीन आवरण (फेल्ट्स, तार तथा स्क्रीन्स)।

रेशायुक्त कच्ची सामग्रियाँ
एच.एन.एल. के रेशायुक्त कच्ची सामग्रियों की आवश्यकताओं के अधिकांश भाग की पूर्ति वन स्रोतों से होती है। उत्कृष्ट गुणवत्तायुक्त एच.एन.एल. के न्यू.जप्रिण्ट का श्रेय अनन्य कच्ची सामग्री सरकंडे (ओकिएन्ट्रा ट्रावनकोरिका) को है, जो कि केरल के वनों की एक विशेषता है।

राज्य के वनों से यूकेलिप्टस काष्ठ एवं सरकंडे की आपूर्ति हेतु केरल सरकार के साथ कंपनी का दीर्घावधिक करार है। घटती हुई वन संसाधनों से विगत कुछ वर्षों में इसकी आपूर्ति में कमी आयी है।

निम्न माध्यम से एच.एन.एल. उपयुक्त विकल्प का विकास की है :

  • विभिन्न संस्थानों यथा रेलवे द्वारा उपलब्ध करायी गयी खाली भूमि पर तथा केरल सरकार द्वारा उक्त आशयों से संबंधित आबंटित भूमि पर अपने संसाधनों तथा तकनीकी जानकारी द्वारा घरेलू वृक्षारोपण में वृद्धि करना।
  • फॉर्म वानिकी योजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से कृषियुक्त भूमि पर लुगदी काष्ठ खेती को बढ़ावा देना।
  • पड़ोसी राज्यों से कच्ची सामग्रियों का प्राप्त किया जाना, जहाँ वे उपलब्ध हैं।
  • ''द्वार पर क्रय योजना'' के अंतर्गत सीधे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं एवं किसानों से यूकेलिप्टस, बाँस तथा अन्य 'लुगदीयुक्त' कच्ची सामग्रियों का क्रय किया जाना।
  • लुगदी निर्माण को कोरा काग.ज का पुनर्चक्रित उपयोग।

रसायन एवं पैकिंग सामग्रियाँ
एच.एन.एल. एक प्रविधि उद्योग होने के नाते, उत्पादन प्रविधि में रसायनों की श्रेणी का उपयोग करती है। इन रसायनों की सूची तथा उनकी वार्षिक आवश्यकताएं निम्नवत्‌ हैं।


 

रसायन
(वार्षिक आवश्यकता - एम.टी. में)

हाईड्रोजेन पेरॉक्साइड(50 ऽ सान्द्रता) 4,600
सोप स्टोन पाउडर (टेलकम) 3,700
कॉस्टिक सोड़ा लाई 4,300
कच्चा चून छिलके 7,000
क्लोरीन 725
नेन फेरिक एलम 1,700
फेरस क्लोराइड (ई.टी.पी. के लिए) 19,000
सोडियम सिलिकेट 2,700
सोडियम सल्फेट 1,100
सल्फ्यूरिक एसिड 450
हाईड्रोक्लोरिक एसिड 150

 

पैकिंग सामग्रियाँ

क्राफ्ट काग.ज 925
ग्रे बोर्ड 575

 

ऊर्जा
एच.एन.एल. के पास 22 मेगा वाट का कोयला पर आधारित आन्तरिक वैद्युतोत्पादन सुविधा है। एच.एन.एल. को इसकी उत्पादन प्रिविधि हेतु बड़ी मात्रा में ईंधन तथा विद्युत की आवश्यकता है।
 

कोयला (देशी व आयातित) 0.15 million MT
बिजली (क्रय किया गया) 1050 lac Units
भट्टी तेल 2500 Kilo litre.

 विनिर्देशनों/मानदण्डों के अनुसार गुणवत्तायुक्त रसायनों तथा अन्य निवेशों की प्राप्ति में एच.एन.एल. विशिष्ट है।

अतिरिक्त सूचना हेतु प्रत्याशित आपूर्तिकर्ता/एजेन्ट्स्‌ कृपया निम्नानुसार संपर्क कर सकते हैं :
श्री. वी.सी. गोविन्दराजन, उ.म.प्र. (वाणिज्य), vcgovindarajan@hnlonline.com

प्रविधि

तीन तरह के लुगदियाँ - रसा-यांत्रिक लुगदी, रसायनिक लुगदी और डी-इंक्ड लुगदी - एकत्रित करके न्यू.जप्रिण्ट बनाते हैं।

रसा-यांत्रिक लुगदी (सी.एम.पी.)

230 बी.डी.एम.टी. प्रति दिन का सी.एम.पी संयंत्र (संड्स डी-फाइब्रेटर, स्वीडेन) लुगदी के उत्पादन हेतु कठोर काष्ठ (यूकेलिप्टेस, अकॉसिया) टुकड़ी का उपयोग करता है। टुकड़ियाँ धोयी जाती हैं, पूर्वभापित की जाती हैं, तथा कॉस्टिक सोड़ा से संसेचित की जाती हैं। संसेचित टुकड़ीयों में से स्पेन्ट क्षार की वसूली की जाने के बाद तीन रैफिनेटर्स के द्वारा यांत्रिक रूप से लुगदीकृत की जाती हैं। रैफिनेटर्स को 6.5 मेगा वाट (बी.एच.ई.एल. निर्मित) सिन्क्रोनस मोटर्स द्वारा चलाया जाता है। ट्वीन रोल प्रेस के उपयोग से प्राथमिक सूक्ष्मीकरण के उपरांत स्पेन्ट रसायनों को निकाल लिया जाता है। दूसरे चरण के सूक्ष्मीकरण के उपरांत लुगदी को धोया जाता है तथा हाईड्रोजन पेरॉक्साइड से विरंजित किया जाता है। टी.सी.एफ. विरंजन प्रविधि का निस्सारी मुक्त प्रचालन होता है। तीसरे चरण के सूक्ष्मीकरण के उपरांत विरंजित लुगदी को पेपर मशीन में आगे उपयोग हेतु उच्च घनत्व युक्त भंडारण टॉवर में भेज दिया जाता है।

रसायन लुगदीकरण (सी.पी.) - क्षमता : 100 बी.डी.एम.टी. प्रति दिन

बी.एच.पी.वी. निर्मित स्थिर अनुलम्ब पाचित्रों के उपयोग से परम्परागत क्राफ्ट प्रविधि के माध्यम से सरकंडा/बाँस टुकड़ी लुगदीकृत किया जाता है। दोहरे धार की धुलाई के उपरांत क्लोरीन तत्पश्चात्‌ हाईड्रोजेन पेरॉक्साइड चरण से लुगदी को विरंजित किया जाता है।

डी-इंकिंग संयंत्र (डिप)

100 टी.पी.डी. डी-इंकिंग संयंत्र में पुराने समाचार पतर्‌ (ओ.एन.पी.) तथा पुराने पत्रिकाग.ज (ओ.एम.जी.) का उपयोग होता है। रद्दी काग.ज को तोला जाता है तथा बैच लुगदीकारक में लुगदीकृत किया जाता है एवं डम्प टॉवर में भंडारित किया जाता है। 2 चरण के द्वारा एच.डी. परिष्कारक के उपयोग से लुगदी को संदुषकों से साफ़ किया जाता है। एक 7 कक्ष युक्त प्लवन प्रविधि द्वारा स्याही को लुगदी से हटाया जाता है। लुगदी को फिर 4 चरणों के सेंट्री क्लीनर्स तत्पश्चात्‌ 3 चरण के स्लॉट स्क्रीन द्वारा साफ किया जाता है। लुगदी को डिस्क निस्यन्दक तथा स्क्रू प्रेस में 30 % सूखापन के साथ गाढ़ा किया जाता है तथा जो कि गर्म बिखराव के अनुरूप होता है। फिर लुगदी को सोडियम हाईड्रोक्साइड के उपयोग से विरंजित किया जाता है तथा उच्च घनत्वयुक्त भंडारण टॉवर में भंडारित किया जाता है। एक बहिस्कार संचालन प्रणाली कराबन 50 % सूखापन के साथ निपटान हेतु बहिष्कृतों को अलग करती है। हमारे एफ.बी.सी. बॉयलर्स में उपयोग हेतु 40 % सूखापन के साथ पंक संचालन प्रणाली स्याही पंक को गाढ़ा कर देती है।

पेपर मशीन में

सी.एम.पी., सी.पी. तथा डी.ऐ.पी. को एक निश्चित अनुपात में मिश्रित किया जाता है तथा एप्रोच बहाव पद्धति के माध्यम से हेडबॉक्स में भेजा जाता है जहाँ पर रसा-योगात्मकों को मिलाया जाता है। पेपर मशीन एप्रोच बहाव पद्धति चार चरणों-युक्त सेंट्री क्लीनर, क्लार्क तथा विकेरियो डीक्यूलेटर पद्धति, प्राइमरी फैन पम्प तथा परिवर्तनशील गति द्वितीय फैन पम्प तथा प्रेशर स्क्रीन्स्‌ से युक्त होता है।

पेपर मशीन वॉइथ, जेर्मनी, की आधुनिक उच्च गतियुक्त मशीन है। अपेक्षित वेग के साथ, द्रवित लुगदी उच्च टर्बूलेन्स डब्लू-टाईप हेड बॉक्स से डयूओफोर्मर 'ट्वीन वायर' निर्मित अनुभाग की तरफ बहता है। काग.ज प्रेस सेक्शन से ड्रायर सेक्शन के तरफ जाता है, जिस में 36 ड्रायर्स तथा थेर्मो कम्प्रेसर, भाप तथा संघनित्र प्रणाली के साथ एक स्वेट ड्रॉयर है। सूखा हुआ काग.ज का सतह दो कस्टर्स स्विमिंग रोल्स के साथ एक चार रोल के खुले कैलेण्डर स्टेक के माध्यम से चिकना किया जाता है।

44 से 54 जी.एस.एम. के न्यू.जप्रिण्ट के उत्पादन हेतु 6.85 मीटर के डेकल (चौडाई) के साथ मशीन को प्रति मिनट (एम.पी.एम.) 750 मीटर की गति पर अभिकल्पित किया गया है। थॉयरीस्टर नियंत्रण के साथ मशीन में सेक्शनल डी.सी. ड्राइव है। अंतिम भाग में वॉइथ का वाइन्डर, जेगेन्बर्ग साल्वेज वाइन्डर तथा क्लैनवेफर्स का रोल लपेटन मशीन है। क्रय किया गया क्राफ्ट पेपर तथा ग्रे बोर्ड के साथ यहाँ कुंडलीकृत कोर मसीन में काग.ज कोर निर्मित होता है।

उपयोगिताएं

तरलीकृत तल ज्वलन के साथ 3 ए.बी.वी./ए.बी.एल. बॉयलर्स द्वारा भाप की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। बी.एच.ई.एल. निर्मित एक रासायनिक वसूली बॉयलर है। 15 मेगावाट और 7 मेगावाट की क्षमता वाले दो टर्बो जनित्र हैं। करीबन 35 % के कुल विद्युत की आवश्यकताओं की पूर्ति राज्य विद्युत बोर्ड से होती है। संयंत्र के उपयोग एवं नियंत्रण हेतु मिल में एक प्रभावी जल एवं वायु आपूर्ति प्रणाली भी है।

निस्सारी उपचार

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं बढ़ते हुए सामाजिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए, एच.एन.एल. ने पर्यावरण तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों को अपनाया है। रंग एवं अन्य प्रदूषकों को निकाला जाता है तथा प्रदूषकों से मुक्त जल को नदी में छोड़ा जाता है। वायु प्रदूषण को भी प्रभावी इलेक्ट्रो स्टेटिक प्रेसिपिटेटर्स द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

प्रौद्योगिकी

उत्कृष्ट गुणवत्तायुक्त अंतिम उत्पाद को सुनिश्चित करने हेतु एच.एन.एल. आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं नियमनिष्ठ प्रविधियों को अपनाती है। कुछ मुख्य अंश निम्नवत हैं :-

  • लागत में कमी तथा गुणवत्ता में सुधार हेतु प्रौद्योगिकी में सतत उन्नयन व उपयोगी प्रबन्धन।
  • सभी संयंत्रों को शामिल करते हुए प्रविधि स्वचालन को संघटित करने हेतु भारत का प्रथम न्यू.जप्रिण्ट निर्माता है।
  • सभी कार्यात्मक क्षेत्रों में ई-अभ्यासों का होना यानी क्रय, वितरण, वित्त, भंडार, मा.सं., प्रविधि एवं अनुरक्षण, ई.आर.पी. के साथ तथा अन्य सहायक मूलभूत संरचनायुक्त नेटवर्क्स - ताकि शीघ्र अनुक्रिया समय सुनिश्चित किया जा सके।
  • ऑन लाईन डिजिटल गुणवत्ता नियंत्रण पद्धति।
  • लुगदीकरण, पेपर मशीन तथा फिनिशिंग जैसे सभी नाजुक क्षेत्रों में तरक्कीयुक्त महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सुधार।

सबसे आगे में
प्रौद्योगिकी में एच.एन.एल. ने सदा तीक्ष्णता का अनुरक्षण किया है। एच.एन.एल. द्वारा उपयोगित आधुनिक प्रौद्योगिकी के कुछ उदाहरण निम्नवत हैं :

  • विरंजन हेतु उपयोगित हाईड्रोजन परॉक्साइड जिसके परिणामस्वरूप बेहतर विरंजन हुआ तथा कम प्रदूषण हुआ।
  • पेपर मशीन हेतु कंप्यूटर पर आधारित गुणवत्ता नियंत्रण पद्धति प्रतिष्ठापित किया गया तथा बाद में उन्नत किया गया।
  • बॉयलर्स का एफ.बी.सी. परिवर्तन।
  • सभी मिल प्रविधि प्रचालनों हेतु डी.सी.एस. का समावेश।
  • रसायनों के वसूली हेतु चून पंक पुनः ज्वलन संयंत्र।
  • रिकवरी संयंत्र में ऊर्जादक्ष फालिंग फिल्म बाष्पक तथा फिनिशर।
  • पूरे मिल में व्यापक कंप्यूटर संजाल हेतु फाईबर ऑप्टिक लॉन को प्रतिष्ठापित किया गया।
  • सभी व्यापारिक गतिविधियों हेतु उद्यम संसाधन योजना (एंटरप्राइ.ज रिसोर्स प्लानिंग - ई.आर.पी.) सॉफ्टवेयर, बॉन को प्रतिष्ठापित किया गया।

 

उत्पादन क्षमता

एच.एन.एल. राज्य में उत्कृष्ट कार्यनिष्पादन करने वाले सरकारी क्षेत्र के उद्यमों से एक है, जो 1990 से लगातार 15 वर्षों से लाभ अर्जित कर रही है।

वित्त वर्ष 2016-17 : उल्लेखनीय तथ्य

उत्पादन 91831  एम.टी.
क्षमता उपयोग 91.83 %
विक्रय 95561  एम.टी.
विक्रय आवर्त   रु. 337.94  करोड़

अनुसंधान व विकास

हिन्दुस्तान न्यू.जप्रिण्ट लिमिटेड के अन्त गृह अनुसन्धान व विकास को वर्ष 1992 में वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान विबाग (डी.एस.ऐ.आर.), विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नई दिल्ली, की मान्यता प्राप्त हुई है। अनु. व विकास अनुभाग जटिल प्रयोगशाला उपस्करों से भली-भांति सुसज्जित है। इससे निम्न क्षेत्रों में अनु. व विकास की गतिविधियां की जाने की सुविधा है।

सुविधाएँ

  • लुगदीकरण
  • विरंजन
  • डी-इंकिंग
  • काग.ज निर्माण
  • रासायनिक वसूली
  • जल उपचार
  • प्रदूषण नियंत्रण

अनुसंधान व विकास गतिविधियाँ

निम्न हेतु अनुसंधान व विकास गतिविधियाँ की जाती हैं :

  • उत्पाद गुणवत्ता तथा मिल की उत्पादकता में सुधार हेतु।
  • परंपरागत कच्चे माल की कमी की पूर्ति हेतु वैकल्पिक कच्चे माल का पता लगाना।
  • वन आधारित कच्चे मालों के संरक्षण हेतु अधिक द्वितीय रेशों का उपयोग।
  • वर्तमान प्रविधि प्रौद्योगिकी में सुधार।
  • बेहतर नम सिरा योज्य की तलाश।
  • न्यू.जप्रिण्ट निर्माण प्रौद्योगिकी को सौहार्दपूर्ण वातावरणयुक्त तथा सुधारयुक्त बनाना। पर्यावरण गुणवत्ता

अब तक पूरा किए गए उत्पाद/प्रविधि विकास कार्य

  • न्यू.जप्रिण्ट फर्निश में 30-35ऽ के दर से डी-इंक्ड लुगदी का उपयोग जिसके फलस्वरूप रासायनिक लुगदी खपत में 25ऽ से 15ऽ तक की कमी आयी।
  • न्यू.जप्रिण्ट स्टॉक में फेरिक फिटकरी की जगह पर गैर फेरिक फिटकरी का मिलाया जाना, जिससे न्यु.जप्रिण्ट की चमक में 0.8ऽ ऐ.एस.ओ. की सुधार हुई।
  • पेपर मशीन के नम सिरा में दोहरी पोलीमर के उपयोग से प्रथम पॉस अवरोधन में सुधार हुआ तथा मुद्रण प्रेसों में फाहायुक्त समस्या में कमी आयी।
  • निस्सारी उपचार संयंत्र में अलूमिना आधारित रसायनों की जगह पर फेरिक क्लोराइड/फेरस क्लोराइड का उपयोग निस्सारी के रंग निष्कासन में प्रभावी साबित हुआ।
  • रसा-यांत्रिक लुगदीकरण प्रविधि में रैफिनेटर्स में खण्डतरीका के परिवर्तन के साथ परंपरागत तीन चरणों के सूक्ष्मीकरण प्रविधि को दो चरणों के सूक्ष्मीकरण प्रविधि में कम किया गया, जिससे उसी स्तर की लुगदी गुणवत्ता हेतु कम बिजली की खपत हुई।

जारी उत्पाद/प्रविधि विकास कार्य :

  • रसायांत्रिक लुगदी के पेरॉक्साइड विरंजन में उच्च गाढ़ापन को बरकरार रखने से लुगदी की चमक में वृद्धि।
  • सरकंडे तथा बाँस रासायनिक लुगदी का ई.सी.एफ. (एलिमेन्टल क्लोरीन फ्री) विरंजन।
  • रसायांत्रिक लुगदीकरण उपज तथा पेरॉक्साइड खपत पर प्रजाति, आयु तथा ऋतु का प्रभाव।

सुविधा दौरा





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